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वैवाहिक यौन संबंध को बलात्कार के अपराध के दायरे से बाहर करता है तो धारा 377 आईपीसी के तहत नॉन वैजिनल पेनिट्रेटिव सेक्सुअल एक्ट !!


याचिकाकर्ता पर पत्नी के साथ कथित रूप से बिना सहमति के गुदा मैथुन के आरोप में आईपीसी की धारा 377 के अपराध के लिए मुकदमा चलाया जा रहा है। उसका तर्क है कि जब एक ही अधिनियम को धारा 375 आईपीसी के तहत छूट दी गई है तो धारा 377 आईपीसी के तहत मुकदमा चलाने योग्य नहीं है। 

एडवोकेट अमित कुमार की ओर से दायर याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या धारा 375 में 2013 का संशोधन कानूनी रूप से विवाहित नागरिकों के लिए धारा 377 के साथ असंगत है। 

याचिकाकर्ता का तर्क है कि इसलिए जब धारा 375 का अपवाद 2 वैवाहिक यौन संबंध को बलात्कार के अपराध के दायरे से बाहर करता है तो धारा 377 आईपीसी के तहत नॉन वैजिनल पेनेट्रेट‌िव सेक्सुअल एक्ट के लिए पति पर मुकदमा चलाना असंगत है।

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत एक पति पर पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध के अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है, जब धारा 375 का अपवाद 2 वैवाहिक यौन संबंध को बलात्कार के अपराध से छूट देता है।


2013 के संशोधन के बाद बलात्कार के अपराध के दायरे का विस्तार किया गया है, जिसमें लिंग-योनि के अलावा अन्य मर्मज्ञ कृत्यों (penetrative acts) को भी शामिल किया गया है।


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