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साल था 1992 ख्वाजा की नगरी अजमेर में एक ऐसे बलात्कार कांड का खुलासा हुआ जिसने पूरे देश को हिला दिया ।

वो खौफनाक सत्य, जिसे लोग भूल चुके :-

साल था 1992 । ख्वाजा की नगरी अजमेर में एक ऐसे बलात्कार कांड का खुलासा हुआ जिसने पूरे देश को हिला दिया । फारूक चिश्ती , नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती । तीन युवा ।  तीनों ही यूथ कांग्रेस के लीडर । इनमे से फारूक प्रेसिडेंट की पोस्ट पर । यानी अजमेर का युवा कांग्रेस अध्यक्ष। इन लोगों का परिवार अजमेर की प्रसिद्ध दरगाह के खादिमों (केयरटेकर्स) से जुड़ा । खादिमों तक पहुंच होने के कारण इनके पास राजनैतिक और धार्मिक, दोनों ही तरह की पॉवर।

बताते हैं फारूक चिश्ती ने सबसे पहले सोफ़िया स्कूल की एक लड़की को प्रेम जाल में फंसाया । सोफिया स्कूल उस दौर में न सिर्फ अजमेर या राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत का लड़कियों का सार्वधिक प्रतिष्ठित स्कूल गिना जाता था । एक दिन धोखे से फारुख ने उस नाबालिग लड़की को फार्म हाउस पर बुला बलात्कार या और लड़की की अश्लील फोटो खींच ली । बाद में इस फोटो के जरिये ब्लैकमेल करके और लड़कियां बुलाई गईं । फारुख और उसके दोस्तों ने उनका जम के यौन शोषण किया और सभी की नग्न फोटोज खींच ली। डर कर लड़कियां अपनी दोस्तों को भी फार्म हाउस ले जाने लगी । उनकी दोस्त अपनी और दोस्तों को । एक के बाद दूसरी, दूसरी के बाद तीसरी। ऐसे करके एक ही स्कूल की करीब सौ से ज्यादा लड़कियों के साथ ब्लैकमेल व घृणित बलात्कार हुआ। याद दिला दूँ की लड़कियां सब नाबालिग । 10वी , 12 वी में पढने वाली मासूम किशोरियां । आश्चर्य की बात यह कि रेप की गई लड़कियों में आईएएस , आईपीएस की बेटियां भी थीं। ये सब किया गया अश्लील फोटो खींच कर। पहले एक लड़की, फिर दूसरी और ऐसे करके सौ से ऊपर लड़कियों के साथ हुई ये हरकत। ये लड़कियां किसी गरीब या मिडिल क्लास बेबस घरों से नहीं, बल्कि अजमेर के जाने-माने घरों से आने वाली बच्चियां थीं ।कहते हैं कि बाकायदा लक्जरी गाड़ियां इन लड़कियों को लेने उनके घर आती थीं और घरों पर छोड़ कर भी जातीं ।

उस जमाने मे आज की तरह डिजिटल कैमरे नही थे । रील वाले थे । रील धुलने जिस स्टूडियो में गयी वह भी चिश्ती के दोस्त और समुदाय वाले का ही था । उसने भी एक्स्ट्रा कॉपी निकाल लड़कियों का शोषण किया । ये भी कहा जाता है कि स्कूल की इन लड़कियों के साथ रेप करने में नेता , सरकारी अधिकारी भी शामिल थे।आगे चलकर ब्लैकमैलिंग में और भी लोग जुड़ते गये ।आखिरी में कुल 18 ब्लैकमेलर्स हो गये। बलात्कार करने वाले इनसे तीन गुने। इन लोगों में लैब के मालिक के साथ-साथ नेगटिव से फोटोज डेवेलप करने वाला टेकनिशियन भी था । यह ब्लैकमेलर्स स्वयं तो बलात्कार करते ही , अपने नजदीकी अन्य लोगों को भी "ओब्लाइज" करते ।

जब इसका खुलासा हुआ तो हंगामा हो गया । इसे भारत का अब तक का सबसे बडा सेक्स स्कैंडल माना गया । इस केस ने बड़ी-बड़ी कोंट्रोवर्सीज की आग को हवा दी । जो भी लड़ने के लिए आगे आता, उसे धमका कर बैठा दिया जाता । अधिकारियों ने , कम्युनल टेंशन न हो जाये,  इसका हवाला दे कर आरोपियों को बचाया । खादिम चिश्ती परिवार का खौफ इतना था जिन लड़कियों की फोटोज खींची गई थीं, उनमें से कईयों ने सुसाइड कर लिया । एक समय अंतराल में 6-7 लड़कियां  ने आत्महत्या की । न सोसाइटी आगे आ रही थी, न उनके परिवार वाले। उस समय की 'मोमबत्ती गैंग' भी लड़कियों की बजाय आरोपियों को सपोर्ट कर रही थी । डिप्रेस्ड होकर इन लड़कियों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया । एक ही स्कूल की लड़कियों का एक साथ सुसाइड करना अजीब सा था। ये बात आगे चलकर केस को एक्सपोज करने में मददगार रही ।

पुलिस के कुछ अधिकारियों और इक्का दुक्का महिला संगठनों की कोशिशों के बावजूद लड़कियों के परिवार आगे नहीं आ रहे थे। इस गैंग में शामिल लोगों के कांग्रेसी नेताओं और खूंखार अपराधियों से कनेक्शन्स की वजह से लोगों ने मुंह नहीं खोला। बाद में फोटो और वीडियोज के जरिए तीस लड़कियों की शक्लें पहचानी गईं। इनसे जाकर बात की गई। केस फाइल करने को कहा गया।लेकिन सोसाइटी में बदनामी के नाम से बहुत परिवारों ने मना कर दिया। बारह लड़कियां ही केस फाइल करने को तैयार हुई। बाद में धमकियां  मिलने से  इनमे से भी दस लड़कियां पीछे हट गई। बाकी बची दो लड़कियों ने ही केस आगे बढ़ाया। इन लड़कियों ने सोलह आदमियों को पहचाना। ग्यारह लोगों को पुलिस ने अरेस्ट किया ।

जिला कोर्ट ने आठ लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई। इसी बीच फारूक चिशती ने अपना मेंटल बैलेंस खोने का सर्टिफिकेट पेश कर दिया । जिसकी वजह से उसकी ट्रायल पेंडिंग हो गई।बाद में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने चार आरोपियों की सजा कम करते हुए उन्हें दस साल की जेल भेज दिया। कहा गया कि दस साल जेल की सजा ही काफी है ।

राजस्थान हाइकोर्ट की न्यायाधीश मोहम्मद रफीक की खंडपीठ ने सर्टिफिकेट के आधार पर फारुख चिश्ती को बरी कर दिया। कम होने बाद राजस्थान गवर्मेंट नें सुप्रीम कोर्ट में इस दस साल की सजा के खिलाफ अपील लगा दी। जजमेंट को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया ।सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान गवर्नमेंट और आरोपियों दोनों की फाइल्स को ख़ारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एन. संतोष हेगड़े और जस्टिस बी. पी. सिंह की बेंच को लगा कि इतने बलात्कारों के लिए दस साल की सजा तो काफी है ! बेहद आस्चार्यजनक!!

एक और आरोपी सलीम नफीस चिश्ती को उन्नीस साल बाद 2012 में पकड़ा गया। वो भी बेल पर छुट कर आ गया। बेल पर आने के बाद से उसके बारे में कोई खबर नहीं है।उसके बाद से इस केस के बारे में कोई  खबर नहीं आयी कि क्या हुआ उन रेपिस्ट्स का? सलीम कहां है? फारूक की दिमागी हालत ठीक हुई कि नहीं?

वो दौर सोशल मीडिया का नहीं पेड मीडिया का था। फिर पच्चीस तीस साल पुरानी ख़बरें कौन याद रखता है?
ये वो ख़बरें थी जिन्हें कांग्रेसी हुक्मरानों ने नोट और तुष्टीकरण की राजनीति के लिए दबा दिया था। अजमेर बलात्कार काण्ड के अपराधी चिश्तियों में से कोई भी अब जेल में नहीं है। बाकी आप जोड़ते रह सकते हैं, एक बलात्कार की सजा सात साल तो सौ बलात्कार की सजा कितनी होगी?

मैं पूछना चाहता हूं, क्या ख्वाजा की मजार पर मन्नते मांगने वाले ख्वाजा से ये सवाल पूछेंगे कि जब सैकड़ों लड़कियों की अस्मत उनके ही वंशजों द्वारा लूटी जा रही थी तब वे कहाँ थे? किसकी मन्नत पूरी कर रहे थे?

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