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सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की आॅनलाइन बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है !अब पटाखे जलाने पर पुलिस गिरफ्तार कर लेगी।

अब पटाखे जलाने पर पुलिस गिरफ्तार कर लेगी।
दीपावली पर मात्र दो घंटे की छूट, शादी ब्याह पर भी असर।
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पर्यावरण के प्रति चिंता जताते हुए 23 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में पटाखे जलाने पर रोक लगा दी है, लेकिन दीपावाली के मौके पर रात 8 से 10 बजे तक पटाखे जल सकेंगे। इसी प्रकार क्रिसमस पर्व और न्यू ईयर को रात 12 बजे पटाखे जलाने के लिए आधा घंटे का समय दिया गया है। इसी प्रकार कुछ खास त्यौंहार पर निर्धारित समय के लिए पटाखे की अनुमति दी गई है। शीर्ष कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि इन दिशा निर्देशों के अलावा पटाखे जलाए गए तो इसे न्यायालय की अवमानना माना जाएगा और पुलिस ऐसे आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है। कोर्ट का कहना रहा कि पटाखे जलने से वातावरण प्रदूषित होता है। पूर्व में दिल्ली एनसीआर में पटाखों पर एक वर्ष के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बाद पूरे देश में पटाखों पर बैन को लेकर एक जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई। इस याचिका पर ही 23 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय दिया है। यह माना कि विस्फोटक सामग्री की वजह से वातावरण दूषित होता है, लेकिन सब जानते हैं कि दीपावली के अवसर पर पटाखे जलाना लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। भारतीय सनातन संस्कृति के अनुसार जब भगवान राम अयोध्या लौटते तो उनके आगमन की खुशी में दीप जलाए गए। बाद में पटाखों की परंपरा शुरू हुई। यानि पटाखे जलाना हमारी धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इसी भावना का ख्याल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली के दिन दो घंटे की छूट दी है। सवाल यह भी है कि हमारे यहां छोटी दीपावली, बड़ी दीपावली, अन्न्कूट, धनतेरस के मौके पर भी पटाखे जलाए जाते हैं। इसी प्रकार शादी ब्याह के मौके पर भी पटाखे जलते हैं। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसा नहीं हो सकेगा। पटाखा कारोबार से लाखों श्रमिक भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में श्रमिकों के सामने भी रोजगार की समस्या खड़ी होगी। देखना है कि इन सब चुनौतियों से सरकार अब कैसे निपटती है।
आॅनलाइन बिक्री पर रोकः
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की आॅनलाइन बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यानि अब कोई भी देशी-विदेशी कंपनी पटाखों की आॅनलाइन बिक्री नहीं कर सकती है। इसी प्रकार लाइसेंस धारी विक्रेता ही पटाखों की बिक्री कर सकेगा।

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