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मानहानि होने पर मिलने वाला मुआवजा या हर्जाना !

मानहानि कानून क्या है ? 

मानहानि के नियम क्या है ?
मानहानि का मामला ?
मानहानि का केस क्या है ?
मानहानि की सजा क्या होती है ?
मानहानि केस प्रोसीजर क्या है ?
मानहानि केस पनिशमेंट क्या है ?
Defamation act इन सभी बारे में हमें पता होना जरुरी है.
दोस्तों, एक गरीब व्यक्ति से लेकर एक बड़े से बड़े व्यक्ति तक उसकी इज्जत उसके लिए बहुत माईने रखती है. कहा भी गया की व्यक्ति को अपनी इज्जत बनाने में वर्षो लग जाते है और इज्जत गवाने में एक मिनट हीकाफी है. समाज में प्रत्येक व्यक्ति को ये अधिकार है की वो अपने प्रतिस्ठा, इज्जत, ख्याति और सामाजिक सम्मान को किसी भी तरह से ठेस पहुंचने से बचा सके और साथ ही अगर कोई व्यक्ति उसकी इज्जत और सौहरत के साथ खिलवाड़ करता है तो वह उसके खिलाफ न्यायालय ( कोर्ट ) में जा सकता है.
किसी भी व्यक्ति की बेइज्जती करना, समाज में उसको निचा दिखाने की कोशिस करना, उस पर कोई झूठा आरोप लगाना, झूठा बेईमान कहना, उसे गाली देना इतियादी मानहानि  केस के अन्दर आते है और उसके लिए आरोप लगाने वाला व्यक्ति अपराधी की श्रेणी में आता है. मानहानि कानून क्या है ?

मानहानि कानून क्या है ? 

मानहानि के नियम क्या है ?  

मानहानि का मामला ? 

मानहानि का केस क्या है ?  

Defamation act 

वो तथ्य जो मानहानि केस के अन्दर आते है ।

[ मानहानि के प्रकार ]

बहुत बार हम किसी व्यक्ति को बिना कुछ सोचे समझे कुछ भी कह देते है लेकिन हमारे द्वारा बिना सोचे समझे कहा गया एक वाक्य और शब्द हमारे लिए मुसीबत बन सकता है. किन किन बातों से , तथ्यों से, इशारों से किसी व्यक्ति की मानहानि होती है इसके बारे में हमें पता होना चाहिए ताकि हम सोच समझ की किसी को कुछ कहे तथा हमें भी अपने अधिकारों के बारे में पता चल सके.
जाति व समुदाय से सम्बंधित : किसी व्यक्ति को निचा दिखाने के उद्देश्य से उसकी जाति , समुदाय और उसके धर्म के बारे में अपशब्द कहना मानहानि के अन्दर आते है. लड़ाई झगडे के दौरान किसी को चमार, चुडा ,कोरी , धानक, भंगी इतियादी कहने से व्यक्ति पर मानहानि का मुकदमा चल सकता है. इसमे अगर कोई व्यक्ति किसी के व्यवसाय को लेकर भी उसकी बेजज्ती करता है जैसे की तुम्हारे समाज का काम तो दुसरो का मल – मूत्र उठाने का है , इस स्थिति में भी व्यक्ति पर मुकदमा चल सकता है.
योग्यता और साख को गिरना : अगर कोई व्यक्ति किसी के कम करने के योग्यता , अनुभव , ज्ञान और तजुर्बे को झूठा साबित करने की कोशिस करना और लोगो में उसका दुष्प्रचार करना मानहानि के अन्दर आते है. इस तरह की मानहानि व्यक्तिगत, सामुहिक और संस्थागत किसी भी रूप में हो सकती है .
किसी व्यक्ति को क़ानूनी रूप से चोर, बे-ईमान, अपराधी, डिफाल्टर इतियादी की संज्ञा मिलने से पहले ही उसको इन नामो से पुकारना व संबोधित करना.
किसी के व्यक्तित्त्व को अपमान जनक तरीके से कुछ कहना और दर्शाना जैसे नाजायज संतान, रंडी, चरित्रहीन, वैश्या, पापी.
किसी की शारीरिक स्थिती को देख कर उसे लंगड़ा ,लूला , अन्धा , पागल , बदसूरत कहना जिसका उदेश्य उसके सम्मान को ठेस पहुंचा हो. किसी व्यक्ति की अच्छी छवि को उसकी मृत्यु के बाद गलत ठहराना व उसके परिजनों को दुःख पहुंचाना.
उपरोक्त बताई हुई बातो में अगर कोई सम्मलित पाया जाता है तो उसे मानहानि केस में दोषी ठहराया जा सकता है.

साइबर मानहानि कानून क्या है ?  :

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66-ए के तहत कोई भी व्यक्ति कंप्यूटर , इन्टरनेट या मोबाइल की मदत से फेसबुक , ट्वीटर , यू ट्यूब तथा अन्य सामाजिक वेबसाइट और उपकरणों से किसी की मानहानि करता है तो 3 साल तक की कैद या जुर्माना या फिर ये दोनों सज़ा हो सकती है.

वो तथ्य जो मानहानि केस के अन्दर नहीं आते है

किसी भी व्यक्ति पर मानहानि का मुकदमा तब तक नही चलाया जायेगा जब की ये साबित नही हो जाये की इसका उद्देश्य दुसरे व्यक्ति के मान सम्मान ठेस को पहुंचाना, उसकी साख गिरना, उसको समाज में निचा दिखाना और उस पर कोई झूठा आरोप लगाना साबित नही हो जाता. इसके लिए पीड़ित व्यक्ति के पास मानहानि से संबंधित सभी सबुत होना जरुरी है.
किसी व्यक्ति को अभद्र, चिडचिडा, पिछड़ा, अनाड़ी जैसे शब्दों से संबोधित करना मानहानि में नही आता.
अगर किसी पर कोई आरोप समाज हीत व लोगो की भलाई के लिए लगाया गया हो तो व्यक्ति मानहानि के मुकदमे से बच सकता है लेकिन इसके लिए व्यक्ति को यह साबित करना होगा की उसका उदेश्य लोगो की भलाई करना था.
किसी व्यक्ति और समाज को अपराधी, चोर व बेईमान लोगो से आगाह करना मानहानि नही है.
किसी पुस्तक, फिल्म , नाटक, व्यक्ति और आदेश की आलोचनात्क समीक्षा करना जिसमे निजी हित शामिल ना हो.

मानहानि केस  का दोषी पाये जाने पर मिलने वाली सज़ा :  मानहानि की सजा

defamation law in India punishment (Defamation Act IPC) 

(defamation ipc 499-500 )  

( punishment of defamation ) 

(manhani case punishment)

भारतीय दंड संहिता की मानहानि की धारा  499 ( defamation ipc 499 ) के अनुसार भारत के प्रत्येक व्यक्ति को अपन मान-सम्मान, शौहरत, यश इतियादी को सुरक्षित रखने का अधिकार है. अगर कोई व्यक्ति धारा 499 के अंतर्गत दोषी पाया जाता है तो उसको निम्न धाराओ के तहत दंड दिया जा सकता है.
धारा 500 : Defamation ipc 500  :अगर कोई व्यक्ति किसी दुसरे व्यक्ति की मानहानि करता है तो उसको धारा 500 के तहत 2 साल तक की कैद या आर्थिक जुर्माना या फिर ये दोनों सज़ा हो सकती है.
धारा 501 : Defamation ipc 501: जान बुझ कर किसी की मानहानि करने करने पर उसको धारा 500 के तहत 2 साल तक की कैद या आर्थिक जुर्माना या फिर ये दोनों सज़ा हो सकती है.
धारा 502 : Defamation ipc 502 :अपने आर्थिक उदेश्य के लिए किसी की मानहानि करने पर धारा 502 के तहत 2 साल तक की कैद या आर्थिक जुर्माना या फिर ये दोनों सज़ा हो सकती है.
धारा 505 : Defamation ipc 503 : किसी खबर, तथ्य और रिपोर्ट को इस तरह से पेश करना जिससे भारतीय जल, थल और वायु सेना का कोई भी सैनिक और अधिकारी विद्रोह या बगावत के लिए तैयार हो जाये. कोई भी ऐसी गलत जानकारी जिससे हमारे समाज में डर और भय का माहोल उत्पन्न हो जाये और लोगो सरकार के खिलाफ हो जाये. इस दोरान आरोपित व्यक्ति को धारा 505 के तहत 2 साल तक की कैद या आर्थिक जुर्माना या फिर ये दोनों सज़ा हो सकती है.

मानहानि होने पर मिलने वाला मुआवजा या हर्जाना :

अगर किसी व्यक्ति की मानहानि होने से उसे आर्थिक नुकसान भी हुआ है तो वह कोर्ट में इसके लिए मानहानि करने वाले व्यक्ति से मुआवजे की अपील कर सकता है. इसमे पीड़ित व्यक्ति को हर्जाने की रकम बतानी होगी और व्यक्ति द्वारा मानहानि करने का ठोस सबुत भी देना होगा.

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