पुराने RTI कानून में क्या बदलाव किए गए हैं ?

सेवा की शर्त
2005 एक्ट के मुताबिक केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल 5 साल (या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो) के लिए निर्धारित किया गया था. संशोधन के बाद अब यह फैसला केंद्र सरकार के हाथों में होगा.
सेवा के दौरान सैलरी
2005 एक्ट के मुताबिक सूचना आयुक्तों और मुख्य सूचना आयुक्तों की सैलरी चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्तों के लगभग बराबर था. नए संशोधन के बाद अब सैलरी, भत्ता और अन्य सभी शर्तों को लेकर केंद्र सरकार फैसला लेगी.
सेवा के दौरान कटौती
2005 एक्ट के मुताबिक अगर किसी की नियुक्ति सूचना आयुक्त या मुख्य सूचना आयुक्त के तौर पर होती है और वह व्यक्ति सरकारी नौकरी के तहत पेंशन या भत्ता पा रहा है तो उसकी सैलरी से उतने पैसे की कटौती कर ली जाती है. नए नियम के मुताबिक अब इस बात का फैसला केंद्र सरकार के हाथों में आ गया है.
अगर हम उदाहरण के तौर पर समझें तो सूचना आयुक्त की सैलरी अगर 1 लाख रुपये होता है और वह पहले से 25 हजार रूपये पेंशन और भत्ता पा रहा है. उस हालत में सरकार सूचना आयुक्त के खाते में 1 लाख 25 हजार रूपये नहीं देगी. पेशन और भत्ता पाने की स्थिति में भी सरकार पेंशन और भत्ते के पैसे को काट कर देती है. यानि आपको हर हाल में 1 लाख रूपये से ज्यादा नहीं मिलेंगे.

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